मैं तेरे इतने करीब आना चाहता हूँ की
हमारे बीच गुस्ताखियों के सिवा गुंजाइश न बचे
उस गुस्ताखी की सज़ा मिले और सजा से माफ़ी ना मिले
और सज़ा मिले तो बमुशक्क़त मिले
हमारे बीच गुस्ताखियों के सिवा गुंजाइश न बचे
उस गुस्ताखी की सज़ा मिले और सजा से माफ़ी ना मिले
और सज़ा मिले तो बमुशक्क़त मिले
रोज़ तेरे पाओं दबाऊं रोज़ तेरे बाल बनाऊं
रोज़ तेरी पीठ सहलाऊँ रोज़ तुझे लोरी सुनाऊँ
रोज़ तुझे कंगन पहनाऊँ रोज़ तुझे पायल पहनाऊँ
माथे में बिंदी भी सजाऊँ आँखों में काजल भी लगाऊँ
रोज़ तेरी बातें सुनूँ रोज़ तुझसे बातें करूँ
रोज़ तुझे हँसाया करूँ रोज़ तेरा दिल बहलाऊँ
रोज़ तुझसे मिन्नतें करूँ रोज़ तुझे घूमाऊँ
रोज़ तेरे संग खाना खाऊँ रोज़ तुझे खिलाऊँ
रोज़ तेरे आँचल से खेलूँ रोज़ तुझे सताऊँ
रोज़ तुझसे झगड़ा करूँ रोज़ तुझे मनाऊँ
रोज़ तेरे संग जगा करूँ रोज़ तुझे सुलाऊँ
हाथों के अपने तकिया बनाके ख़ुद कंबल बन जाऊँ
तेरे अंदर के सैलाब को अपनी बाहों में समेट लूँ
तू मुझमें बिखर जाए मैं तुझमें बिखर जाऊँ