नदियों की बहती धार हो तुम
सागर का सकल आकार हो तुम
सागर का सकल आकार हो तुम
तुम अन्नपूर्णा, तुम वनस्पति
जीवों का जीवनदान हो तुम
तुम मातृ पितृ तुम वहिनी भ्राता
संस्कृतियों का भीषण संग्राम हो तुम
तुम दिक् भी हो तुम काल भी हो
सूरज का रोशन भाल हो तुम
प्रकृति का यौवन श्रृंगार हो तुम
शिव के नेत्र का अंगार हो तुम
तुम भूमि हो, हे भूमि तुम
जीवन का अंतिम सार हो तुम
इस सृष्टि का आधार हो तुम