Wednesday, 25 January 2017

इंतज़ार

किस किससे पूछूँ, किसका ऐतबार करूँ,
तू ही बता कब तक तेरा इंतज़ार करूँ ।

क़यामतें बीती जा रही हैं दीदार-ए-यार को,
तेरी तस्वीर से ही अब अपनी चाहत का इज़हार करूँ ।

जब भी मेरे दिल में तेरी यादों का तूफ़ान उठे,
तेरे कंगन से खेलूँ , तेरी पायल से झनकार करूँ ।

ना तुझसे कुछ कह सकूँ ना तुझसे कुछ सुन सकूँ ,
लफ़्ज़ों को ही अब अपनी तड़प का राज़दार करूँ ।

मैं तुझसे ना मिल सकूँ तो ना सही ,
किसी और से मिलने से भी मैं अब इनकार करूँ ।

मैं जब तक जिऊँ, मैं तब तक मरूँ ,
तू ही बता कब तक तेरा इंतज़ार करूँ ।

Tuesday, 9 August 2016

रंजिश

कुन्ज-ए-दिल में छुपी एक रंजिश सी है,
राह-ए-हयात में मक़ाम हासिल न हुआ ।

क़त्ल तो अरमानों के हुए कई दफ़ा,
गिरफ़्तार मगर कोई क़ातिल न हुआ ।

फिरती रही किश्ती मीलों समंदर में,
बदकिस्मत के नसीब में साहिल न हुआ ।

टकराता रहा जाम महफ़िल में दोस्तों की,
कोई भी ग़म-ए-दिल से वाकिफ़ न हुआ ।

होंसला पूरा था मंज़िल मुकम्मल थी
सिम्त न मिली मालूम जानिब न हुआ ।

हुई मुलाक़ात यूँ तो राह में कई फनकारों से
दिल-ए-नादान फन-ए-ज़िन्दगी का माहिर न हुआ

नासमझ ने माने कानून सभी मैदान-ए-जंग के
बुतपरस्त भी इस ज़माने में काफिर न हुआ

गुहारें लगाता रहा मुद्दई मुंसिफ की कचहरी में
गवाह-ओ-सबूत इक भी हाज़िर न हुआ

ज़माने में है खूब चर्चा मेरी मोहब्बत का
उसका यूँ संगदिल हो जाना वाज़िब न हुआ

मेरी नाकामियों में मिलता है चैन-ओ-आराम उसे
खुदा का कोई बन्दा जहाँ में इतना ज़ालिम न हुआ

मोहब्बतें तो ‘मनु’ ने बहुत कीं बहुतों से कीं,
वफ़ा-ए-सनम इक भी हासिल न हुआ ।

Thursday, 4 August 2016

Review: A Fine Balance

A Fine Balance A Fine Balance by Rohinton Mistry
My rating: 5 of 5 stars

A Fine Book.

It is a piece of fiction but it can't be any closer to the truth. Reading it takes you closer to reality rather than taking you away from it.

The book contains exceptional insights into human emotions and behaviour and still better expression of the same. The love, the loss, the friendship, the family, the discrimination, the daring, the help and the helplessness.

The events narrated in the book underline, again and again, the feeling of helplessness that overcomes. The reader cannot remain untouched by the feeling of helplessness being felt by the characters. Often the conditions are just too stubborn to be dictated or even influence by us in the slightest.

Balance is the essence of life and this book captures it beautifully. The conditions endured by the characters and the path they choose in the end balances out each other. Those who endured the worst continue to struggle while those who suffered the least abandon the struggle.

A balance between Hope and Despair is perfectly maintained.

A Fine Balance

A Fine Balance by Rohinton Mistry

View all my reviews

Monday, 1 August 2016

The Feeling Called Love

Love favours,
For those who labour,
Silent perseverance,
No need for clamours.

Love happens,
Without permissions,
Pleasure and pain,
With limited remissions.

Love colors,
The life of lovers,
The sight of whom,
Although it blurs.

Love nurtures,
The soul of creatures,
And gets reborn,
In all its futures.

Love reminds,
To put behind,
The emptiness, the loneliness,
And the troubles of every kind.

Love creates,
What hate destroys
Warmth and completeness,
In all its ploys.

Love binds,
The two minds,
With divine brilliance,
No shields, no blinds.

Love teaches,
The heart it breaches,
To lose oneself,
When the other one reaches.

Love amuses,
For silly excuses,
Saves the moment
From unwanted recuses.

Love eludes,
Who deal in crudes,
It's a game of finesse,
Not for the shallow or the prudes.

Love hurts,
In little spurts,
Longing for the beloved,
Whose return it asserts.

Monday, 22 June 2015

प्रयास

भर-भर के पन्ने तोड़ दी कलमें ,
इतना मगा कि पड़ गए सदमें। 

किया यूज़ नीला कभी काला पैन ,
सजाया कॉपी को किया अंडरलैन।

सूरज उठा तब गए सोने को ,
मिला नहीं एक पल खोने को। 

किया नहीं कभी नैन-मटक्का ,
फोकस रखा करते थे पक्का। 

कुरुक्षेत्र और पढ़ी योजना ,
और हिन्दू को पड़ा चाटना।

निकल गयी तोंद  गिर गए बाल ,
 घिस-घिस के हो गए बुरे हाल। 

कर के मर गए अथक प्रयास ,
मंज़िल मिली न एक्को बार। 

फिर भी मन न मचलता है ,
जानता है, प्रयास ही सफलता है।





Sunday, 14 June 2015

अनुभूति


मोबाइल को फुल रिचार्ज कराके ,
बिना बात के बातें करना ,
बात फिर भी ख़त्म न होती ,
प्रथम प्रेम की अनुपम अनुभूति।

सारी रात करवट ले-लेकर,
खुली आंखोँ से स्वप्न देखना ,
नींद कभी न पूरी होती ,
प्रथम प्रेम की अनुपम अनुभूति।

बात-बात पर गुस्सा होकर ,
यूहीं रूठना और मनवाना ,
 हर पल मेरे हृदय को छूती ,
प्रथम प्रेम की अनुपम अनुभूति।

 प्रिय-विरह के दुःख में पिसकर ,
हर चेहरे में उसे देखना ,
मधुर मिलन के सपने बुनती ,
प्रथम प्रेम की अनुपम अनुभूति।