थोड़ी सी मुहब्बत माँगी कोई एतराज़ नहीं
हम भी तो तेरे आशिक़ हैं ये कोई राज़ नहीं
हम भी तो तेरे आशिक़ हैं ये कोई राज़ नहीं
दोस्ती, मशवरा, सब अदा करेंगे तेरी शान में
क्या मैं शाहजहाँ और तू मेरी मुमताज़ नहीं
तेरी याद में एक कमरा तो बनवा ही देंगे
ये इश्क़ किसी ताजमहल का मोहताज नहीं